१. सब पूछते हैं मुझसे , तुम हो क्यूँ ऐसी
मैंने भी कह दिया मैं नहीं तुम जैसी
इतने मुखौटे डालूं भला क्यूँ
तज़रबा हो इसका कोशिश की नहीं वैसी
२. चाहे अँधेरा हो या उजाला
तू मेरा खुदा मेरा आशियाना
मैं मीरा बन नाचूँ, ओ सांवरे
अपनी झलक को, यूँ न तरसाना
३. एक अनचाही कोशिश कि आज मैंने
कि इबादत करूं उसकी तुझसे पहले
भुला सकूँ तुझे तेरी ही खातिर
औरों के लिए जियूं तेरे जैसे
४. काश कभी मुझे भी प्यार हो, कोई मेरा भी यार हो
किसी की मैं भी राह ताकूँ, उनका मुझे दिदार हो
ये आंखें फिर ना हों यूँ ही नम किसी रोज कभी
हर वक्त उनके ही ख्यालों मेरा बसर हर बार हो
५. क्यूँ कब कहाँ कैसे कुछ सवाल न करो
कितना दिया कितना पाया ये ख्याल न करो
मोहब्बत तो खुदा की इबादत है यारों
जिसे करो तो फिर मलाल न करो
६. बड़ी शिद्दत से हुनर सीखाते हैं आप
गुरु भांति राह दिखलाते हैं आप
कमाल है फिर भी कोई गुरुर नही खुद पर
कैसे बखूबी ये कलम चलाते हैं आप
- आरोही
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