कारवाँ : जज़्बात हमारे !!



कितना प्यारा है न ये प्यार....
      थोडा अलग सा ...कुछ मीठा तो हल्का तीखा भी

कमाल है ....कैसे प्यारी हो जाती है ये ज़िन्दगी किसी के होने भर से ...उसकी सांसों की चहल-पहल मानो मन के उबड-खाबड़ रास्ते को फूलों की चादर-सा बना दे .......मन के उठते तूफानों को एक झोंके भर से शीतल कर दे..

देखो ना ...कभी ख़ामोशी भी गुनगुनाने लगती है ..तो कभी झुकी आँखें भी दिल की बेचैनी ब्यान कर देती..!!


मैंने देखा है खुद को उन आँखों में संवरते,
                मैंने देखा है खुद को उनकी बाँहों में सिमटते,
मद्धम सी रौशनी में वो आँखों का मचलना,
               मैंने देखा है ख्वाबों को हकीक़त भी बनते ||

मैंने देखा है उनका बंद आँखों से भी हमें पहचानना,
                मैंने देखा है सांसों से मन को भांप जाना,
मुँह फेर कर भी बस हमीं को एकटक देखना,
                मैंने देखा है उनका मुँह फुला भी हमसे प्यार करना |
कदम दर कदम हमको निहारना
                मैंने देखा है उनका वो गजब सा मुस्कुराना ||

मैंने सुना है ज़ुबान का न कहकर भी हाँ कहना,
                मैंने सुना है खामोश लबों का गुनगुनाना |

कहने भर को है दूरी दिल रहते गुंधे हुए,
                उन्हें चाहकर जान पाए ये फलसफे बुने हुए |

मैंने छुआ है उन्हें मन के हर कोने से,
               मैंने झलक उनकी देखी मन के झरोंखे से

मैंने देखा है खुद को उन आँखों में संवरते,
                मैंने देखा है खुद को उनकी बाँहों में सिमटते,
मद्धम सी रौशनी में वो आँखों का मचलना,
                मैंने देखा है ख्वाबों को हकीक़त भी बनते ||

-- आरोही 

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