किसी पल कहा मेरे दिल ने, वो मूक प्राणी अच्छे,
किस तरह सब अच्छा बुरा समझ जाते, जाने से पहले वो सबके बन जाते ।
प्यार की भाषा सीखो, जरा उनसे, जो बिन कहे सब कह जाते ।
इन राहों पे, गुमसुम-सा मेरा दिल बहक गया क्यूँ
तेरी दुनिया तेरी माया, तेरी है ये काया
इंसान हूँ मैं, फिर भी हूँ ऐसी क्यूँ
किसी पल कहा मेरे दिल ने, वो मूक प्राणी अच्छे ।
ये फूल पत्ते चुप ही अच्छे,गुमसुम हैं पर मुस्कुराहट से खुशियाँ तो देते हैं
चाहे कितना भी सहना पड़े इनको, प्यारा-सा मुस्कुरा देते हैं
क्यूँ न सीखूं मैं कुछ इनसे, जानू मैं इनसे कैसे है जीना ,
फिर मुस्कुराती, नाचती गाती, जी लूँ खुलके ये जहाँ ।
किसी पल कहा मेरे दिल ने, वो मूक प्राणी अच्छे ।
" आरोही ''
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