Tuesday, 26 March 2013

कैसे ये यादें साथ रही ....!!


आज अपने नीमु पेड़ तले, जब टेक लगा कर यूँ बैठी,

        आँखों के आगे जैसे, एक नन्ही परी थी, खेल रही l

भाग रही वो तितली संग ही , फूलों संग थी झूम रही ,

        कुछ यादें जैसे, हो खींच रही , सुबकाती मुझे हँसाती सी l

जाने पल मीठे बचपन के , वो बीत गए, क्यूँ बीत गए

       कैसे ये यादें साथ रही, जीवन के हर उस कलरव की l

जाने पल मीठे बचपन के , वो बीत गए, क्यूँ बीत गए l



वो मिटटी की, चौड़ी मंडेर पे, अब चढ़े महीने हो गए l

       वो मंजी डाल, बैठी अम्मा से, छेड़ा-छाड़ी हम भूल गए l

वो घंटों बैठ, कम्बल में उसके, अटपटी कहानियाँ सुनना,

       फिर जी भर के, अपना वो, हँसते-हँसते सो जाना  l


जाने पल मीठे बचपन के , वो बीत गए, क्यूँ बीत गए  l

      कैसे ये यादें साथ रही, जीवन के हर उस कलरव की l

जाने पल मीठे बचपन के , वो बीत गए, क्यूँ बीत गए l



वो बालों को सहलाना तेरा , कान खींच डपट लगाना ,

    अब ओझिल सा हो गया क्यूँ ,वो तेरा प्यार से खिलाना l

चलती सिलाईयों के बीच , रोक-रोक आधा बुना स्वेटर, ओढ़-ओढ़ वो इठलाना l

पूरी होती टोपी के लिए हमारा वो लड़ते जाना l

    रंग-बिरंगी ऊन में खुद को उलझाना, फिर मुस्काना l



कहाँ गई वो बातें  बचपन की , उस मीठे मौसम की l

    तेरे आँचल की ओट तले अब सोना हम क्यूँ  छोड़ गए  l


जाने पल मीठे बचपन के , वो बीत गए, क्यूँ बीत गए l

    कैसे ये यादें साथ रही, जीवन के हर उस कलरव की

जाने पल मीठे बचपन के , वो बीत गए, क्यूँ बीत गए l


कैसे भूलूँ वो याद पुरानी, जहाँ गिरके उठना संभलना, यूँ खेल-खेल में सीखा हमने,

    जहाँ जीत को भी ,औरों की खातिर ,यूँ हार में बदलना सीखा हमने l

बैठी थी जब, खोयी हुई, यूँ गुमसुम सी, उन लम्हों में

    आया पथिक एक, मेरी ओर, कहता मैं भी, इसी पथ का तो राही हूँ  l


तुम क्यूँ बैठी, यहाँ ठहरी, यूँ रुकने में कुछ मर्म नहीं  l

    ले चलो संग इन लम्हों को, साथ चलें उस मंजिल पर l


जीवन तो बहती नदिया है, यूँ रुकने में कुछ मर्म नहीं l

    कैसे ये यादें साथ रही, जीवन के हर उस कलरव की ,

जाने पल मीठे बचपन के, वो बीत गए, क्यूँ बीत गए l

"आरोही"

4 comments:

  1. Among all your poems on this blog till date, this one is my favorite. It had a beautiful feel and rhythm to it. Reminded me of childhood days! :)

    ReplyDelete
  2. thanx goes to u :)
    i'll try to bring such rhythm in my coming poems too :)

    ReplyDelete
  3. बिटिया मत कह एक कहानी
    याद आगये मुझको बचपन के
    एक थाराजा एक थी रानी




    उम्दा पोस्ट

    ReplyDelete
  4. @neelima sharma ji

    आपका तहेदिल से शुक्रिया :)

    ReplyDelete