देखा आज करीब से
एक बाप को उसकी नन्ही परी बेचते
चंद सिक्कों के लिए
चंद सांसों के लिए ,
चंद दिनों की रोटी के लिए
बहुत रोया वो
चंद टुकड़ों की खातिर अपनी जान जो बेच दी
जैसे हार गया हो ज़िन्दगी से I
पर अफ़सोस फिर और गहरा हुआ...जब देखा उस पिता को
जिसने बेचा अपने बेटे और बेटी को
मात्र अमीरी के शौंक को जिंदा रखने को
आह रे ...... ख़ुशी थी उसके चेहरे पर फिर भी
समझ नहीं पाई किसकी हार हुई और क्यूँ !!
- “आरोही”
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