Monday, 20 May 2013

आजा रे !!



आजा साजना आजा
किसी दिवस किसी रैन,
ताकते तेरा रास्ताभीगे-भरे ये बावरे नैन 
कह दे बस कुछ पल का है और इंतज़ार,
फिर तरसे मन को होगा तेरा दीदार 

देख तो सहीकैसे ये मन पल-पल छले मुझे
हवा कि सरन-सरनतेरे आने कि आहट लगे मुझे 
कैसे पगली-सीहाँ पगली-सी हो गयी
तुझे सोच-सोच मैं तुझमें खो गयी,
बिन हुए भी तेरी ही हो गयी  

पत्तों कि ओट से दूर तक झांकती,
दौड़े-दौड़े मौड़ तक पत्थरों पर भागती 
पर क्षितिज तक उड़ती धूल भी
,
मानो गुमसुम हैकैसे मुझे ही ताकती

यूँ पल बीते जा रहेये दिन बीते जा रहे,
क्यूँ ख़बर नहीं तेरी कोईअब ये नैना सूखे जा रहे
आजा साजना आजाकिसी दिवस किसी रैन,
ताकते तेरा रास्ताभीगे भरे ये बावरे नैन 















तू मस्त गगन का पंछी रे,
अब ऊँचे-ऊँचे उड़ता फिरे
मैं हूँ तेरी बावरी
ठहरी यहीं,
इस नदिया तीर   

आजा साजना आजाकिसी दिवस किसी रैन,
ताकते तेरा रास्ताभीगे-भरे ये बावरे नैन 
कह दे बस कुछ पल का है और इंतज़ार,
फिर तरसे मन को होगा तेरा दीदार 


-"आरोही "



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